Sunday, June 3, 2012

पंचत्व में विलीन हुए अगड़ों के मुखिया ब्रह्मेश्वर सिंह

बिहार के वीर शहीद रणवीर सेना के संस्थापक एवं अगड़े जाती के सबसे बड़े मसीहा ब्रह्मेश्वर सिंह उर्फ़ मुखिया जी आज पंचत्व में विलीन हो गए| आज मुखिया जी की अंत्येष्टि पटना के प्रसिद्ध बांस गहत पर संपन्न हुआ| मेरे भी कुछ मित्र मुखिया जी के सव यात्रा में शालिम थे, एक लम्बी कतारों में समस्त बिहार से लोग मुखिया जी के अंतिम दर्शन के लिए पटना आए थे, सभी के मुखों से नारे निकल रहे थे मुखिया जी अमर रहे| वो सवर्णों के भगवान थे और भूमिहार के शान थे| ऐसे महापुरुष को खोना काफी दुखद बात है| अंत्येष्टि के दौरान सेना के समर्थकों ने कई जगहों पर आगजनी की और अपना रोष प्रकट किया| शव यात्रा के दौरान मुखिया जी के समर्थकों ने नेताओं का जमकर बहिष्कार किया|
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सी.पी. ठाकुर पर भी हमला किया गया है। उनकी गाड़ी क्षतिग्रस्त हो गई। जेडीयू सांसद ललन सिंह के साथ भी ब्रह्मेश्वर के समर्थकों ने बदसलूकी की है। समर्थक पुलिस पर भी हमला कर रहे थे। पुलिस भागती नजर आ रही थी। वह कुछ नहीं कर रही थी।

ब्रह्मेश्वर सिंह के शव यात्रा को देखते हुए आरा-पटना सड़क मार्ग पर अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी, लेकिन पुलिस ने कोई हस्तक्षेप नहीं की। समर्थक रास्ते भर हंगामा करते रहे। जबरन दुकाने बंद करवाते रहे। मीडिया पर भी हमला किया। रास्ते में लोगों की पिटाई भी की। करीब 50 से ज्यादा जगहों पर आगजनी की। कई गाड़ियों में आग लगाई गई। ब्रह्मेश्वर के समर्थक पूरी योजना के साथ पटना आए थे। अपने साथ पेट्रोल, डीजल और केरोसिन ऑयल लाए थे। उन्होंने पटना में घुसते ही तांडव शुरू कर दिया था।

शनिवार की देर शाम करीब 7 बजे हजारों लोगों की मौजूदगी में पटना के बांस घाट पर ब्रह्मेश्वर के शव को उनके बेटे ने मुखाग्नि दी।
गौरतलब है कि ब्रह्मेश्वर मुखिया की शुक्रवार की सुबह अज्ञात अपराधियों ने आरा में उनके घर से कुछ दूरी पर गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद हत्या से आक्रोशित लोगों ने पूरे आरा में प्रदर्शन किए। कई वाहनों को फूंक दिया गया तथा कई सरकारी दफ्तरों को आग के हवाले कर दिया गया। प्रशासन को आरा शहर में कर्फ्यू भी लगानी पड़ी। हत्या के बाद पूरे राज्य में अलर्ट घोषित कर दिया गया है।

मैं न्यूज़ चैनलों पर
अंत्येष्टि की खबर देख रहा था इस बार मुखिया जी के शव यात्रा के दौरान हुए आगजनी के ऊपर मिडिया सरकार और पटना प्रसाशन को निशाना बना रही थी मैं उन मिडिया वालो से पूछना चाहता की क्या आपको इतना भी समझ नही आता की अगर उस वक़्त पुलिस प्रसाशन थोड़ी भी हिन्षक होती तो माहौल और ख़राब होता और समर्थक और भी रौद्र रूप धारण कर लेते मैं में मिडिया वालों को फिर से कहना चाहूँगा की थोडा समझ कर इतने गंभीर विषय पर बोले क्योकि नही मुझे नही लगता में सारे राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल वालो को मुखिया जी के सकसियत के बारे में कुछ पता होगा| मैं मानता हम हूँ उस वक़्त जो भी प्रसाशन ने किया वो बिलकुल सही था वरना कोई भी गलत कदम पूरे मध्य बिहार/ मगध प्रान्त को एक बार फिर जातिगत हिंसा की और धकेल देता|

मैं उन रणवीर सेना के समर्थकों से भी अनुरोध करता हूँ की भाइयों सामाजिक समरसता को टेष ना पहुंचाए जिन जगहों पर आगजनी कर रहे है सब सामाजिक संपत्ति जिसको नुक्सान करके वो खुद रोजमर्रा की ज़िन्दगी में कमी कर रहे हैं| भाइयों मित्रों और रणबीर सेना के समर्थकों ये समय आगजनी का नही है बल्कि सवर्णों के एकजुट होने का है सत्ता को हिलाने का है| कानून में भरोसा रखे मुखिया जी को हमसे अलग करने वालों को सजा जरुर मिलेगा और आपसे एक बार फिर अनुरोध करता हूँ मुखिया जी के क़ुरबानी को बेकार ना होने दो और समस्त सवर्ण/ अगदी जाति एकजुट होकर समाज के लिए काम करे और मुखिया जी के आत्मा को शांति दे| 

सुमीत श्रीवास्तव
संपादक, लोकतंत्र दर्पण 

Friday, June 1, 2012

अगड़ी जाति के मसीहा नही रहे ब्रह्मेश्वर मुखिया

बिहार रणवीर सेना के संस्थापक और अगड़ी जाति के मसीहा ब्रह्मेश्वर मुखिया की आज सुबह 4 बजे कुछ लोगों ने हत्या कर दी| इस हत्या के बाद सारे शहर की जनता में उबाल आ गया और हर जगह सेना समर्थकों ने तोड़-फोड़ तथा आगजनी शुरू कर दी| आईए जानते हैं कौन थे यह ब्रह्मेश्वर सिंह उर्फ़ मुखिया जी और क्या था इनके संगठन का उद्देश्य| रणबीर सेना का गठन ब्रह्मेश्वर मुखिया ने भोजपुर जिला के बेलारु नमक गावं में सन 1994 में किया था|  रणवीर बाबा एक महान सेनानी के नाम के ऊपर इस संगठन का नाम रणवीर सेना रखा गया| रणबीर सेना का मुख्य उद्देश्य तब समझ में आया जब 29-अगस्त-2002 को इस सेना के प्रमुख ब्रह्मेश्वर मुखिया को पटना से गिरफ्तार कर लिया गया और उनके पास से एक डायरी बरामद की गयी और तब उस डायरी से तत्कालीन पत्रकारों ने ब्रह्मेश्वर मुखिया के द्वारा लिखे गये संगठन के कार्य के अहम् पहलुओं को बताया| इस डायरी में कश्मीर के विषय पर चर्चा थी कहा गया था की रणवीर सेना कश्मीर में हिन्दुओं के लिए हिमगिरी प्रदेश चाहती है| इस में कई पन्ने कश्मीर के मसले के ऊपर लिखे गये थे| कश्मीर को दो भागों बंट झेलम के उत्तेर – पूर्व के हिस्से को हिन्दुओं का प्रदेश घोषित किया जाए जम्मू , कठुआ उधमपुर , डोडा व पूंछ को मिलाकर हिमगिरी प्रदेश बनाया जाए | लद्दाख केन्द्रशासित प्रदेश बने | डायरी में धारा 370 के विरोध की भी बात थी| इतना ही नही इस डायरी में अयोध्या राम मंदिर, मथुरा और काशी को भी मुक्त करने की बात का उल्लेख किया गया था| इस डायरी से यह भी पता चलता है की मुखिया पंडित दीनदयाल जी की पुस्तक एकात्म मानववाद को प्रेरणा का श्रोत मानते थे|
ब्रह्मेश्वर मुखिया ने सेना के सांगठनिक स्वरूप का वर्णन किया है उसके मुताविक उसके पास स्कवाड , एरिया , जोनल कमांडर . प्रवक्ता , खजांची , करा – मुक़दमा संचालन प्रभारी , पुनर्वास सहाय्य प्रभारी,अकेंक्षण प्रभारी व सैन्य प्रशिक्षण प्रभारी तक हैं |  ऐसा मना जाता है की मुखिया जी महात्मा गाँधी की टिपण्णी को डील से लगाकर बैठ गये थे की अंगेरजी हुकूमत ने हमसे हतियार छीनकर हमें नपुंशक बनाया है और इस वहज से वह हथियारबंद दस्ते पर ज्यादा ध्यान देते थे| मुख्य करण जिसके करण रणबीर सेना प्रकाश में आई वो था रणवीर सेना और नक्सलियों के बीच  हुए कई नरसंहार। लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार इसमें सबसे बड़ा है। ऊंची जाति के 37 लोगों की हत्या के जवाब में दिसंबर 1997 में किए गए इस नरसंहार में 58 दलितों की हत्या कर दी गई थी। इसमें ब्रह्मेश्वर को मुख्य अभियुक्त माना गया था। गिरफतारी के वक़्त मुखिया पर 22 मुक़दमे डाले गये जिसमे से 16 में वह बरी हो गये थे और 6 मुकदमो में वह जेल से बेल पर एक वर्ष पहले बहार निकले थे|  अगड़ी जाति के इस मसीहा के मृत्यु बिहार की राजनीती एक बार फिर गरमा गई है और ब्रह्मेश्वर सिंह की मृत्यु पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सी.पी.ठाकुर ने शोक जताया और बिहार सरकार से इस मसले पर तुरंत सी.बी.आई के जाँच की मांग की वही भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मुख़्तार अब्बास नकवी ने इसे मानवता को कलंकित करने वाला विषय बताया है| मेरी व्यक्तिगत राय माने तो जिस तरह के विचार रणवीर सेना के बारे में उस डायरी से निकले थे और पत्रकारों ने देश की जनता के सामने रखा था वैसी विचारधारा किसी राष्ट्रद्रोही  और उग्रवादी संगठन के हो ही नही सकते| एक बात और मैंने जहाँ तक सुना है जद(यू) नेता एवं राज्यसभा सांसद शिवानन्द तिवारी भी उन्हें आदर और सम्मान सहित "मुखिया जी" कह कर बुलाते थे| आज जब मैं NDTV देख रहा था तो उसपर शो चल रहा था ” Butcher of Bihar Killed ” जिसे देख कर मुझे मिडिया की कृतिम और विकृत मानसिकता पर हंसी भी और गुस्सा तो बहुत जोड़ का आया की में अंधी गूंगी और बहरी मिडिया को ये समझ में नही आता की मुखिया जी के मृत्यु के कारण पुरे मध्य बिहार/मगध प्रान्त की जनता में इतन आक्रोश आ गया है वो कैसे ” Butcher of Bihar " हो सकता है| यह कहना की रणवीर सेना को सिर्फ एक जाति का समर्थन था यह गलत है, रणवीर सेना को सारे अगड़ी जाति का समर्थन था| आज सारे मिडिया को दलितों का नरसंहार दिखाई देता और बिना देर किये ” Butcher of Bihar Killed ” का उपाधि देते पर उन्हें ये क्यों नही दीखता की नक्सलियों किस प्रकार से सवर्ण जाति के लोगों के साथ किया और उनके खेत हड़पने के लिए कितने नरसंहार किये हमारी बहु-बेटियों की इज्जत लुटी|
सुमीत श्रीवास्तव
संपादक, लोकतंत्र दर्पण